आतंकित जब गली-गली है

अतुलनीय अटलजी "व्यक्तित्व, विचार व विरासत"

तन पर पहरा, भटक रहा मन,
साथी है केवल सूनापन,
बिछुड़ गया क्या स्वजन किसी का,
क्रन्दन सदा करुण होता है।
दूर कहीं कोई रोता है....
जन्म दिवस पर हम इठलाते,
क्यों न मरण-त्यौहार मनाते,
अंतिम यात्रा के अवसर पर,
आँसू का अशकुन होता है।
दूर कहीं कोई रोता है...
अंतर रोये, आँख न रोये,
धुल जायेंगे स्वप्न सँजोये,
छलना भरे विश्व में
केवल सपना ही तो सच होता है।
इस जीवन से मृत्यु भली है,
आतंकित जब गली-गली है।
मैं भी रोता आसपास जब,
कोई नहीं होता है।
दूर कहीं कोई रोता है।