अटल बिहारी वाजपेयी

अतुलनीय अटलजी

"व्यक्तित्व, विचार व विरासत"

ब्रजेश पाठक

(श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी मेमोरियल फाउंडेशन)

अतुलनीय अटलजी: प्रेरक जीवन दर्शन

‘‘देखने में सीधे-सादे लेकिन मौलिक विचारक, कुशल संगठनकर्ता दूरदर्शिता, सबको साथ लेकर चलने वाले का जो गुण उन्होंने प्रकट किया, उसने नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का काम किया। ऊँची से ऊँची शिक्षा प्राप्त करके भी उन्होंने नौकरी नहीं की, वे परिवार के बंधनों में नहीं बँधे, शरीर का कण-कण और जीवन का क्षण-क्षण उन्होंने भारत माता के मस्तक को सौभाग्य के सिंदूर से मंडित करने के लिए समर्पित कर दिया। वाणी में संयम, विचार में सम्पूर्ण देश, सबको साथ लेकर चलने की भावना, जो भी उनके सम्पर्क में आये, वे आज भी उनके अभाव का अनुभव करेंगे। हमें उनकी पवित्र स्मृति को हृदय में संजोकर ध्येय पथ पर आगे बढ़ना होगा। राजनीति उनके लिए साधन थी, साध्य नहीं। वे राजनीति का आध्यात्मीकरण करना चाहते थे। वे भारत के उज्जवल अतीत से प्रेरणा लेते थे तथा उज्ज्वलतर भविष्य का निर्माण करना चाहते थे। उनकी आस्थाएँ सदियों पुराने अक्षय राष्ट्र-जीवन की जड़ों से रस ग्रहण करती थी किन्तु वे रूढ़िवादी नहीं थे।

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अटलजी जितने बड़े राजनेता उतने ही महान लेखक भी थे। उनका लेखन एक संवेदनशील, कर्तव्यनिष्ठ और मौलिक विचारकों सदृश होता था। उनका गद्य लेखन भी उनकी कविताओं जैसा ही मर्मस्पर्शी और सोच को झंकृत करने वाला है। उनके लेखों को पढ़ने के बाद प्रतीत होता है कि अटलजी के विचार आज और भी अधिक प्रासंगिक और सामयिक हैं। उन्होंने कई पुस्तकें लिखी और उनके अनगिनत संग्रहणीय लेख पांचजन्य, स्वदेश, वीर अर्जुन, राष्ट्रधर्म, चेतना समेत कई प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। यहाँ राष्ट्रीयता, भारतीय संस्कृति और भारतीय भाषाओं के उन्नयन पर केन्द्रित उनके तीन लेखों को अध्ययनार्थ प्रकाशित किया जा रहा है ।

G8 शिखर सम्मेलन

- संपादक

संग्रहणीय लेख

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राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक है कि हम राष्ट्र की स्पष्ट कल्पना लेकर चले। राष्ट्र कुछ संप्रदायों अथ...

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भारतीयकरण एक नारा नहीं जीवन-दर्शन है, एक प्रतिक्रिया नहीं, ऐतिहासिक प्रक्रिया है। अनादिकाल से भारत अनेक जातियों त...

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ऐतिहासिक संबोधन

आजादी अमर शहीदों व सेनानियों की देन हमें इसकी रक्षा करनी होगी

मेरे प्यारे देशवासी, बहनों, भाइयों और बच्चों। अपने देश की स्वतंत्रता की 51 वीं वर्षगाँठ पर मेरी ओर से आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ । देखते-देखते आधी शताब्...

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आने वाला कल हमारा होगा

स्वागताध्यक्ष महोदय, प्रतिनिधि बन्धुओं, बहनों और सज्जनगण, दिन जाते देर नहीं लगती। काल का चक्र निरन्तर चलता रहता है। वह न किसी के लिए थमता है, न रुकता है। ...

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अटल जी की प्रिय व प्रतिनिधि कवितायें

आओ फिर से दिया जलाएँ...

भरी दुपहरी में अँधियारा, सूरज परर्छाइं से हारा, अन्तरतम का नेह निचोड़ें, बुझी हुई बाती सुलगाएँ। ...

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मन की फकीरी पर

पेड़ के ऊपर चढ़ा आदमी ऊँचा दिखाई देता है। जड़ में खड़ा आदमी नीचा दिखाई देता है। आदमी न ऊँचा होता ह...

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गीत नहीं गाता हूँ

बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं,टूटता तिलस्म, आज सच से भय खाता हूँ। ,गीत नहीं गाता हूँ... पीठ में छुरी सा चा...

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