अतुलनीय अटलजी "व्यक्तित्व, विचार व विरासत"
बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं,
टूटता तिलस्म, आज सच से भय खाता हूँ। ,
गीत नहीं गाता हूँ...
पीठ में छुरी सा चाँद, राहु गया रेखा फाँद, ,
मुक्ति के क्षणों में बार-बार बँध जाता हूँ।
आत्मा की प्यास बुझती जा रही है।
गीत नहीं गाता हूँ..