अतुलनीय अटलजी "व्यक्तित्व, विचार व विरासत"
मैंने जन्म नहीं मांगा था, किन्तु मरण की माँग करूँगा।
जाने कितनी बार जिया हूँ, जाने कितनी बार मरा हूँ।
जन्म-मरण के फेरे से मैं, इतना पहले नहीं डरा हूँ।
अन्तहीन अँधियार ज्योति की, कब तक और तलाश करूँ।
मैंने जन्म नहीं मांगा था, किन्तु मरण की माँग करूँगा।
बचपन, यौवन और बुढ़ापा, कुछ दशकों में खत्म कहानी।
फिर-फिर जीना, फिर-फिर मरना, यह मजबूरी या मनमानी?
पूर्व जन्म के पूर्व बली, दुनिया का द्वाराचार करूँगा।
मैंने जन्म नहीं मांगा था, किन्तु मरण की माँग करूँगा।