मस्तक नहीं झुकेगा

अतुलनीय अटलजी "व्यक्तित्व, विचार व विरासत"

एक नहीं, दो नहीं, करो बीसों समझौते पर स्वतंत्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा। अगणित बलिदानों से अर्जित यह स्वतंत्रता अश्रु, स्वेद, शोणित से सिंचित यह स्वतंत्रता त्याग, तेज, तप, बल से रक्षित यह स्वतंत्रता प्राणों से भी प्रियतर यह स्वतंत्रता। इसे मिटाने की साजिश करने वालों से कह दो चिनगारी का खेल बुरा होता है औरों के घर आग लगाने का जो सपना वह अपने ही घर में सदा खरा होता है। अपने ही हाथों तुम अपनी कब्र न खोदो अपने पैरों आप कुल्हाड़ी नहीं चलाओ ओ नादान पड़ोसी अपनी आँखें खोलो आजादी अनमोल न इसका मोल लगाओ। पर तुम क्या जानो आजादी क्या होती है तुम्हें मुफ्त में मिली न कीमत गई चुकाई अँगरेजों के बल पर दो टुकड़े पाए हैं माँ को खंडित करते तुमको लाज न आई। अमरीकी शस्त्रों से अपनी आजादी को दुनिया में कायम रख लोगे, यह मत समझो दस-बीस अरब डालर लेकर आने वाली बरबादी से तुम बच लोगे, यह मत समझो। ।"