अतुलनीय अटलजी "व्यक्तित्व, विचार व विरासत"
हाथों की हल्दी है पीली, पैरों की मेहँदी कुछ गीली
पलक झपकने से पहले ही सपना टूट गया
दीप बुझाया रची दिवाली लेकिन कटी न मावस काली
व्यर्थ हुआ आवाहन स्वर्ण सबेरा रूठ गया। सपना टूट गया ।
नियति नटी की लीला न्यारी सब कुछ स्वाहा की तैयारी
अभी चला दो कदम कारवाँ साथी छूट गया। सपना टूट गया।